किराए की कोख

 womb-1-45x62हमारे देश में हर साल करीब 30-35 लाख महिलाएं शादी के बंधन में बंधती हैं, जिसमें से 8-10 लाख महिलाएं ताउम्र निसंतान होने का दुख झेलती हैं। वहीं यहां अनचाहे गर्भ को ढोने वाली माताओं की कोई कमी नहीं है जिसका नतीजा है अनचाहे बच्‍चों की फौज। पर अपनी वंश बेल चलाने के लिए दंपत्ति आज भी किसी गैर का बच्‍चा गोद लेने से कतराते हैं। खून का रिश्‍ता होना बहुत जरूरी माना जाता है ऐसे में दंपत्ति एग डोनेशन, स्‍पर्म डोनेशन या सरोगेसी जैसे चिकित्‍सकीय विकल्‍पों का सहारा लेते हैं। इनमें चूंकि सेरोगेसी में बच्‍चे के साथ जेनेटिक संबंध बरकरार रहता है इसलिए इसे एक बेहतरीन विकल्‍प माना जा रहा है। ऐसा नहीं था कि समस्‍या पहले नहीं थी। पर पहले समस्‍या का हल स्‍त्री का दूसरा विवाह करा या फिर पति का किसी दूसरी स्‍वस्‍थ स्‍त्री के साथ संसर्ग कराके हल किया जाता था जिसमें परिवार वालों की भी मूक सहमत‍ि रहती थी। खैर सेरोगेसी की बात करें तो इसमें सबसे अहम होती है एक किराय की कोख। आइए जानते हैं कितने में और कौन उपलब्‍ध करवाता है यह सब।

आंकड़ों की मानें तो भुखमरी और बदहाली के कारण भारतवर्ष में तो देह परोस कर परिवार का चूल्‍हा जलाने वालों की कमी है और ही अपनी कोख किराए पर देने वालों की। एक से तीन लाख रुपए जिसमें कोख में बच्‍चा आने से लेकर बच्‍चा दंपत्ति को सौंपने तक का चिकित्‍सकीय खर्चा भी शामिल है, एक गरीब स्‍त्री के लिए काफी है।

इस तरह भारत में यह खर्चा यूरोप से तकरीबन 7 गुना कम बैठता है। यही कारण है कि यूरोपीय देश सरोगेट मां के लिए भारत की ओर रुख कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 2012 तक यह कारोबार 2-3 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। इंटरनेट पर उपलब्‍ध वेबसाइट्स और विज्ञापनों को देखने पर यह तथ्‍य और भी साफ हो जाता है कि पैसा लेकर अपनी कोख को किराए पर देना अब एक आम बात है। यहां साधन संपन्‍न साधनहीन लोगों के बीच खाई भी स्‍पष्‍ट हो जाती है चूंकि कोई साधन संपन्‍न स्‍त्री शायद ही किसी गैर मर्द का बच्‍चा जनने के लिए अपनी कोख को किराए पर देना स्‍वीकारेगी। बहुत सी गरीब औरतें घर का चूल्‍हा जलाने के लिए अपनी देह परोसने से अच्‍छा अपनी कोख किराए पर देकर परिवार समाज में रहते हुए पैसा कमाना एक अच्‍छा सौदा मानती हैं। इसलिए तो बड़ी ही खामोशी से 1 से तीन लाख रुपए में देश के ही नहीं बल्कि विदेशी दंपत्तियों के लिए सरोगेट मदर यहां उपलब्‍ध हैं जरूरत है तो बस अखबार वेबसाइट्स खंगालने की।