अगर कमांडो बनना चाहते हैं, तो

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मुंबई में हाल ही में हुए आतंकी हमलों के बाद युवाओं का रुझान एनएसजी और मैरीन कमांडो जैसी फोर्स की तरफ बढ़ा हुआ है। हमलों के बाद कई रिपोर्ट आईं कि युवाओं ने उस दौरान इन फोर्सेस की साइट को जमकर देखा और यह जानने की कोशिश की कि किस तरह इसनमें करियर बनाया जा सकता है। आंकड़ों की जुबान में कहें तो गूगल पर 53,90,000 बार एनएसजी सर्च किया गया, जो अपनी कहानी खुद बयां करता है।
क्‍या है एनएसजी : नेशनल सिक्‍योरिटी गार्ड भारत का प्रमुख कमांडो आर्गेनाइजेशन है जो आतंक विरोधी फोर्स के तौर पर जाना जाता है। दो दशक से भी ज्‍यादा पुरानी इस फोर्स ने कई मौकों पर देश को अपनी सेवाएं दी है। मुंबई घटना के दौरान कमांडो ने जिस चपलता और बहादुरी का नमूना पेश किया, उससे सब वाकिफ हैं। देश में आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए इस फोर्स की शिद्दत से जरूरत महसूस की गई। इसकी स्‍थापना 1984 में की गई थी।
एनएसजी एंटी हाइजेकिंग, बंधकों को छुड़ाने और आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए किया जाता है। एनएसजी वीआईपी, इंटरनेशनल और नेशनल फ्लाइट में स्‍काई मार्शल ड्यूटी भी प्रदान करते हैं। अपने प्रतीक सुदर्शन चक्र की तरह एनएसजी हरदम देश को अपनी सेवाएं देने को तैयार रहते हैं। मुश्किल की घडि़यों में एनएसजी ने हमेशा अदम्‍य साहस का परिचय दिया है। सर्वत्र, सर्वोत्‍तम, सुरक्षा सूत्र वाक्‍य की तर्ज पर एनएसजी कमांडो देश की सुरक्षा को मजबूती प्रदान करते हैं।
एनएसजी की क्षमताओं की परख देश ही नहीं, विदेशों में भी है। वेस्‍ट इंडीज और इंटरनेशनल किक्रेट बोर्ड ने 2007 के क्रिकेट विश्‍वकप के दौरान एनएसजी से यह अनुरोध किया था, कि वह उसके स्‍टेडियम में बम की खोज करे और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लें। एनएसजी कमांडो ने दिल्‍ली में हुई सार्क बैठक के दौरान गणमान्‍य लोगों की कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई थी।
भर्ती प्रक्रिया
एनएसजी प्रत्‍यक्ष रूप से कैडेट की भर्ती नहीं करती। केंद्रीय पुलिस संस्‍थान और भारतीय सेना ऑफिस से लेकर जेसीओ, और सब इंस्‍पेक्‍टर का चयन करता है। उन्‍हें तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में भेजा जाता है। इसके बाद दोबारा उन्‍हें पेटेंट कैडर में भेज दिया जाता है।
उन्‍हें इस दौरान मनेसर में एनएसजी ट्रेनिंग सेंटर में तीन माह के ट्रेनिंग प्रोग्राम से गुजरना पड़ता है ताकि वह इस फोर्स के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें। एनएसजी कमांडो को भाषा एटोंमिक रिसर्च सेंटर में भी नाभिकीय, जैविक और कैमिकल युद्ध के मद्देनजर प्रशिक्षण दिया जाता है।
कैसे काम करता है एनएसजी - एनएसजी संगठन में मुख्‍यत: चार डिपॉर्टमेंट, एडमिनिस्‍ट्रेटिव डाइरेक्‍टोरट, ऑपरेशन डाइरेक्‍टोरेट, ट्रेनिंग सेंटर और फाइनेंस डिपॉर्टमेंट होते हैं। एडमिनिस्‍ट्रेटिव डाइरेक्‍टोरेट के अंतर्गत मेडिकल, इंटेलीजेंस, इंजीनियरिंग और एडमिनिस्‍ट्रेशन आता है, तो ऑपरेशन के अंदर ट्रेनिंग और कम्‍युनिकेशन आते हैं। फाइनेंस डिपॉर्टमेंट पे और अकाउंट का काम देखता है।

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